घड़ी में सुबह के साढ़े चार बज रहे थे रोज की तरह आज भी सर्दी अपनी वर्दी उतारने को तैयार थी क्यूँकि सूरज से जो मिलने वाली थी। वैसे सूरज से उसकी कुछ ख़ास तो नई बनी अब तक पर बसंत आतें ही वो करीब आने लगतें है और ऐसा भी नहीं है कि बसंत पहली बार आया हो उनकी लाइफ में इससे पहले भी ना जाने कितने बसंत आएं और चले गए पर सर्दी कभी ऐसी आशावादी ना थी। ना जाने पहले ऐसा क्या हुआ था कि सर्दी अपने समय पर रहती तो थी पर खोयी खोयी लगती थी। कभी रूखापन,कभी मनमानापन तो कभी हफ्तों सूरज के सामने ना जाना कभी-कभी तो इतनी कठोर हो जाया करती की मानव को ही जमा दे पर सर्दी हमेशा ऐसी ना थी। हाँ कुछ अखबारों से सुना था कि क्लाइमेट चेंज हो रहा जिससे उसकी लाइफ में भी बहुत तेजी से बदलाव आ रहे है उसे खुद ही नहीं पता चल रहा था की क्या हो रहा है। उसके लाइफ साइकिल में तेज़ी से बदलाव आ रहा था इसलिए वो हमेशा खोयी रहती थी और किसी को अपनी लाइफ में लाकर वो उसे खोना नहीं चाहती थी और किसी एक को दोष भी नहीं दे सकती थी कि क्यों हो रहा है ये? पर उसे अच्छा लगता था शरद आते ही गुस्से में झुण्ड बनाकर बैठी पत्तियों के संग खेलना जो इसलिए गुस्सा थी कि पेड़ से जो अलग हो गयी थी पर हवा के समेटने पर उड़कर दूर तक चली जाती थी। पेड़ों पर नयी कोपलों को देखकर उसका भी मन झूमने लगता था। घने कोहरे में वृक्षों को अपने आगोश में लेकर लुकाछुपी खेलने में उसे बहुत मजा आता था पर क्लाइमेट में हो रहे बदलाव ने मानो उससे ये सब छीन सा लिया हो। पर अब उसमें कुछ नयी उमंग सी जगी है इस नयी बसंत को लेकर वो घंटो सूरज का इंतज़ार करती है और ओस की गिरती हर बूँद पर उसका ध्यान होता है क्यूंकि सूरज के आने पर वो चमक जो उठती थी और सूरज का
आभास सर्दी को हो जाता था। ❤
खैर अभी तो घडी में शार्प 5 ही बजे है अभी समय था सूरज के आने में इसी सन्नाटे के बीच फ़ोन का अलार्म जो अपने में ही सेट रहने लगा था अचानक से बज उठता है अब उसे मतलब नहीं रहा था किसी से क्यूंकि पूरी सर्दीभर किसी ने उसको रेस्पेक्ट ही नहीं दिया। कभी भी उसकी टोन को सुनकर कोई राइट टाइम ही नहीं हुआ हमेशा आंखें बंदकर के ही रजाई के भीतर से ही उसे म्यूट कर दिया गया। अब भला इतना सब कुछ सहने के बाद किसका ईगो हर्ट नहीं होगा तो बस तब से अपने में ही लोनली हो गया बेचारा। पर रहना है तो सहना वाले टैग के साथ जी रहा है अपनी जिंदगी ये सोच कर कि मौसम बदलेगा और मिस्टर राइट अपनी लाइफ को लेकर टाइट होंगे फिर अपना टाइम आएगा, ये मानकर वह कोने में फ़ोन के साथ सो गया। तभी सर्दी को पछियों के चहचाने की आवाज़ सुनाई पड़ती है उसके चेहरे पर एक घनी सी स्माइल आने लगती है वो जैसी ही बाहर आकर देखती है पत्तियों पर ओस की बूँदें चमक उठती है। वह देखती है सूरज को चमकते हुए और खो जाती है उसे पता ही नहीं चलता कि कब सूरज उसके इतना नजदीक आ गया... फिर?.......💖💖💖💖 फिर क्या दोनों नयी डेट पर जाते है।
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