गोल-गोल रानी इत्ता इत्ता पानी बचपन में पढ़ी इस कविता नें हमें सिर्फ मछली और पानी के होने को बताया है. काश हमनें ये भी पढ़ा होता गोल गोल रानी सिर्फ इतना सा है पानी तो आज हम विश्व जल दिवस नहीं मना रहे होते. खैर इस वर्ष 22 मार्च को हमने विश्व जलदिवस का 25वाँ बर्थडे मनाया जिसका उद्धेश्य लोगो तक साफ़ और सुरक्षित पानी पहुँचाना है. UNO द्वारा शुरू किये गए विश्व जलदिवस की इस वर्ष की थीम है "वाटर फॉर नेचर" यानि प्रकति के लिए पानी, अब प्रश्न उठता है कि ऐसी थीम बनाने की क्या जरुरत है?
प्रकति के पास तो पहले से पानी है वो भी 97% जैसा की हम सब जानतें है फिर? पर जानकारी के लिए बता दो UNO ने इस बार लोगो से आग्रह किया है की पानी को बचाने के लिए ऐसे साधनों का प्रयोग में लाये जो प्रकति पर आधारित हो. जैसे पेड़ लगाना, नदियों को समतल से जोड़ना और जलचक्र को मेन्टेन रखने में सहायक जलभूमि को संरक्षित करना. गौरतलब है कि आज दुनिया में 2.1बिलियन लोग ऐसे है जिनके घरों में पीने के लिए पानी नहीं है और पानी के लिए उन्हें घर से दूर जाना पड़ता है और एक हम लोग है जो अपने घरों में समरसेबिल लगवाए जा रहे है. शहर वाले तो गरदा मचाये है मानो सरकार ने कोई बिल लाया हो की घर में समरसेबिल जरुरी है वर्ना बिजली का कनेक्शन काट दिया जायेगा. एक समय था जब घर में बम्बा और रोड पर सरकारी नल लगा हुआ करते थे जिससे हम सिर्फ उतना ही पानी उपयोग में लातें थें जितने की हमें जरुरत होती थी. टेक्नोलॉजी ने जहाँ हमें थोड़ा सुस्ताने का मौका दे सरपट भागना सिखाया है वहीँ आनन-फानन में हमें पानी का अत्यधिक उपयोग करना भी सिखाया. हमारे द्वारा उपयोग किये पानी का 80% हम बिना यूज़ किये नालियों में बहा देते हैं बिना ये सोंचे की यह धरती कितना देगी जिससे भूमिगत जलस्तर में गिरावट आ रही है जिसके बारें में हमें सोचने का टाइम ही नहीं मिलता है अब तो धरती रुखी नदिया सुखी जंगल को भी हमने साफ़ कर दिया है और रेन वाटर हार्वेस्टिं तो सिर्फ किताबों में ही पढ़ना अच्छा लगता है उसे आज भी हम जमीन पर उतार नहीं पाएं है. अब वह दिन दूर नहीं जब पानी पेट्रोल बन जायेगा और थोड़ा सा पानी पीने के लिए हम दूर भागेंगे.Saturday, March 31, 2018
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
पेन मेरा
आज पेन को देखकर याद आया कब से खाली पड़ा था ये कागज़ जिसे हमेशा ये सोचकर संजोय रखता था की जब लिखूंगा इसपे कुछ लिखूंगा और ये कहकर न जाने कितने ...
-
जुगनू कहाँ छुपा के रखें है तुमने जुगनू ? जो शाम होते ही दिखतें थे, अब तो सुबह भी हो जाती है तब भी ...
-
गोल-गोल रानी इत्ता इत्ता पानी बचपन में पढ़ी इस कविता नें हमें सिर्फ मछली और पानी के होने को बताया है. काश हमनें ये भी पढ़ा होता गोल गोल...
-
बस जाती है कई बस्तियां, एक शहर को बसाने में। अपने गावों से चलकर रोजी-रोटी के लिए शहर को आ जातें है ये लोग, फिर बस जाती है कई बस्तिय...


No comments:
Post a Comment