Thursday, February 6, 2020
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पेन मेरा
आज पेन को देखकर याद आया कब से खाली पड़ा था ये कागज़ जिसे हमेशा ये सोचकर संजोय रखता था की जब लिखूंगा इसपे कुछ लिखूंगा और ये कहकर न जाने कितने ...
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जुगनू कहाँ छुपा के रखें है तुमने जुगनू ? जो शाम होते ही दिखतें थे, अब तो सुबह भी हो जाती है तब भी ...
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गोल-गोल रानी इत्ता इत्ता पानी बचपन में पढ़ी इस कविता नें हमें सिर्फ मछली और पानी के होने को बताया है. काश हमनें ये भी पढ़ा होता गोल गोल...
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बस जाती है कई बस्तियां, एक शहर को बसाने में। अपने गावों से चलकर रोजी-रोटी के लिए शहर को आ जातें है ये लोग, फिर बस जाती है कई बस्तिय...

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