Thursday, February 6, 2020
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पेन मेरा
आज पेन को देखकर याद आया कब से खाली पड़ा था ये कागज़ जिसे हमेशा ये सोचकर संजोय रखता था की जब लिखूंगा इसपे कुछ लिखूंगा और ये कहकर न जाने कितने ...
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जुगनू कहाँ छुपा के रखें है तुमने जुगनू ? जो शाम होते ही दिखतें थे, अब तो सुबह भी हो जाती है तब भी ...
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यूँ मुस्कुराकर मुझसे कहने लगा भविष्य मेरा, है चाह तुझमें दिन की पर दूर है सवेरा, पहले ढूंढ उस सूर...
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ये वीरानिया ये सूनापन आखिर कब तक रहेगा? क्या इस रात के बाद भी कोई सूरज उगेगा ? ...

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