
मुझे पता है अब
तुम लगभग चार साल बाद आओगी और मुझे ये भी पता है इन सालों
में बहुत कुछ बदल जायेगा.जहाँ घर से निकलती गलियां सड़कों में तब्दील होंगी, सड़के महामार्गो में, गाँव शहर बनेंगे और शहर महानगरों में,न जाने कितने मौके आएंगे तुमको भूलने के जिसमें दिन हफ्ता, हफ्ते,महीने और महीने साल और साल कैलेंडर वर्ष बन जायंगे और इन चार सालो में कई कैलेंडर बदलेंगे पर मेरे
दिल के कैलेंडर में तुम हमेशा रहोगी.अपने अनोखेपन और नई खुशबू से साल की हर पतझड़ के बाद अपने रंगों से नए जीवन
को भरोगी. इससे पहले भी कई बार तुम्हें देखा और अनजान बनता रहा शायद समझ न थी या
तुम कॉमन से लगती थी पर अब लगा की हाँ तुम सच में जा रही हो इसलिए डर लगता है.अभी
कुछ ही दिन हुए थे तुम्हें सच में जानके एक बार तुमको
लेकर थोड़ी बहस भी हुई पर थोड़ा कम वाकिफ था तुमसे पर अब तो लगता है बहुत देर कर दी
तुमको जानने में बहुत कुछ समेट रखा था तुमने अपने अन्दर पता नहीं मेरे लिए तुम
क्या सोचती थी.मुझे नहीं पता पर हाँ वैलेंटाइन
वीक में तुमसे यह जानने की इच्छा जरुर हुई एक बार की क्या सचमच तुम वैसी हो जैसा
में सुनता आया हूँ या तुम महज एक महीने की अंतिम तारीख
हो जो हर साल 28 से रेस करते हुए हर चौथे साल में जीत जाती है और जिसे वही मुकाम
हासिल होता जो बाकि महीनों में 30 और 31 को. खैर जो भी हो फ़िलहाल तुम जा रही हो.तुम्हारा इंतजार तो हमेशा से करता था पर इस बार तुम बहुत ही ख़ास थी और हाँ
आगे भी रहोगी पर ‘आई विश’ में तुम्हें फिर
से पीछे ले जाता और कुछ पल रोक के वह सबकुछ पूछता जो शायद कल तक मेरे अन्दर ख़त्म
हो जाये.चलो फिर आना ‘सायो नारा’.

