Saturday, February 29, 2020

29 फरवरी






 मुझे पता है अब तुम लगभग चार साल बाद आओगी और मुझे ये भी पता है इन सालों में बहुत कुछ बदल जायेगा.जहाँ घर से निकलती गलियां सड़कों में तब्दील होंगी, सड़के महामार्गो मेंगाँव शहर बनेंगे और शहर महानगरों में,न जाने कितने मौके आएंगे तुमको भूलने के जिसमें दिन हफ्ता, हफ्ते,महीने और महीने साल और साल कैलेंडर वर्ष बन जायंगे और इन चार सालो में कई कैलेंडर बदलेंगे पर मेरे दिल के कैलेंडर में तुम हमेशा रहोगी.अपने अनोखेपन और नई खुशबू से साल की हर पतझड़ के बाद अपने रंगों से नए जीवन को भरोगी. इससे पहले भी कई बार तुम्हें देखा और अनजान बनता रहा शायद समझ न थी या तुम कॉमन से लगती थी पर अब लगा की हाँ तुम सच में जा रही हो इसलिए डर लगता है.अभी कुछ ही दिन हुए थे तुम्हें सच में जानके एक बार तुमको लेकर थोड़ी बहस भी हुई पर थोड़ा कम वाकिफ था तुमसे पर अब तो लगता है बहुत देर कर दी तुमको जानने में बहुत कुछ समेट रखा था तुमने अपने अन्दर पता नहीं मेरे लिए तुम क्या सोचती थी.मुझे नहीं पता पर हाँ वैलेंटाइन वीक में तुमसे यह जानने की इच्छा जरुर हुई एक बार की क्या सचमच तुम वैसी हो जैसा में सुनता आया हूँ या तुम महज एक महीने की अंतिम तारीख हो जो हर साल 28 से रेस करते हुए हर चौथे साल में जीत जाती है और जिसे वही मुकाम हासिल होता जो बाकि महीनों में 30 और 31 को. खैर जो भी हो फ़िलहाल तुम जा रही हो.तुम्हारा इंतजार तो हमेशा से करता था पर इस बार तुम बहुत ही ख़ास थी और हाँ आगे भी रहोगी पर ‘आई विश’ में तुम्हें फिर से पीछे ले जाता और कुछ पल रोक के वह सबकुछ पूछता जो शायद कल तक मेरे अन्दर ख़त्म हो जाये.चलो फिर आना ‘सायो नारा’.

Thursday, February 6, 2020

चादर

किस ख्वाब में उलझे हो जनाब?
एक काली रात
एक आधा चांद
सरसरती हवा में
कपकपाते तारें,
ये अभी तक इंतजार में हैं।
गर सुलझ गए हो तुम
तो बुन भी दो ना
इक चादर हमारी भी
कब तक यूंही बैठोगे
किसी के ख्वाब लिए ?
अब बुन भी दो ना
गर सुलझ गए हो तुम
एक चादर हमारी भी ।

पेन मेरा

आज पेन को देखकर याद आया कब से खाली पड़ा था ये कागज़ जिसे हमेशा ये सोचकर संजोय रखता था की जब लिखूंगा इसपे कुछ लिखूंगा  और ये कहकर न जाने कितने ...